श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  1.8.81 
वृन्दावन - दासेर पाद - पद्म क रि’ ध्यान ।
ताँर आज्ञा लञा लिखि याहाते कल्याण ॥81॥
 
 
अनुवाद
मैंने श्रील वृन्दावन दास ठाकुर के चरण कमलों की प्रार्थना करके उनसे अनुमति ली थी, और उनकी आज्ञा पाकर मैंने यह शुभ साहित्य लिखने का प्रयास किया है।
 
Then I prayed at the lotus feet of Srila Vrindavana Das Thakura and sought his permission and after getting his permission I have tried to write this auspicious book.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd