श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.8.78 
एइ ग्रन्थ लेखाय मोरे ‘मदन - मोहन’ ।
आमार लिखन येन शुकेर पठन ॥78॥
 
 
अनुवाद
वास्तव में श्री चैतन्यचरितामृत मेरी रचना नहीं, बल्कि श्री मदनमोहन की श्रुतलेखिका है। मेरी रचना तो तोते के दोहराने के समान है।
 
In fact, the Sri Chaitanya Charitamrita is not my work, but was dictated by Sri Madanmohan. My writing is merely parrot-like repetition.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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