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श्लोक 1.8.65  |
तेंहो अति कृपा करि’ आज्ञा कैला मोरे ।
गौराङ्गेर शेष - लीला वर्णिबार तरे ॥65॥ |
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| अनुवाद |
| अपनी अहैतुकी कृपा से उन्होंने मुझे श्री चैतन्य महाप्रभु की अंतिम लीलाओं के बारे में लिखने का आदेश दिया। |
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| By His causeless grace, He ordered me to write the last Leelas of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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