|
| |
| |
श्लोक 1.8.59  |
पण्डित - गोसाञि र शिष्य - अनन्त आचार्य ।
कृष्ण - प्रेममय - तनु, उदार, सर्व - आग्न ॥59॥ |
|
| |
| |
| अनुवाद |
| अनंत आचार्य गदाधर पंडित के शिष्य थे। उनका शरीर सदैव भगवान के प्रेम में लीन रहता था। वे सभी प्रकार से उदार और उन्नत थे। |
| |
| Ananta was a disciple of Acharya Gadadhara Pandita. His body was always immersed in the love of God. He was generous and elevated in all respects. |
| ✨ ai-generated |
| |
|