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श्लोक 1.8.46  |
चैतन्य - चन्द्रेर लीला अनन्त अपार ।
वर्णिते वर्णिते ग्रन्थ हइल विस्तार ॥46॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान चैतन्य की लीलाएँ असीम एवं अथाह हैं। अतः उन सभी लीलाओं का वर्णन करने से यह ग्रन्थ विशाल हो गया। |
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| The Leelas of Chaitanya Mahaprabhu are infinite and unfathomable, hence by describing all these, this book has become huge. |
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