श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.8.46 
चैतन्य - चन्द्रेर लीला अनन्त अपार ।
वर्णिते वर्णिते ग्रन्थ हइल विस्तार ॥46॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य की लीलाएँ असीम एवं अथाह हैं। अतः उन सभी लीलाओं का वर्णन करने से यह ग्रन्थ विशाल हो गया।
 
The Leelas of Chaitanya Mahaprabhu are infinite and unfathomable, hence by describing all these, this book has become huge.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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