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श्लोक 1.8.36  |
चैतन्य - निताइर य़ाते जानिये महिमा ।
याते जानि कृष्ण - भक्ति - सिद्धान्तेर सीमा ॥36॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य-मंगल को पढ़कर मनुष्य भगवान चैतन्य और नित्यानंद की समस्त महिमाओं और सत्यों को समझ सकता है और भगवान कृष्ण की भक्ति सेवा के अंतिम निष्कर्ष पर पहुँच सकता है। |
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| By reading Sri Chaitanya Mangal, one can understand all the glories or truths of Sri Chaitanya Mahaprabhu and Nityananda Prabhu and can reach the ultimate conclusion of devotion to Lord Krishna. |
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