श्रुति-स्मृति-पुराणादि- पंचरात्र-विधिं विना
एकान्तिकी हरि भक्तिः उत्पात्या एव कल्पते
"प्रभु के प्रति वह भक्ति सेवा जो अधिकृत वैदिक साहित्यों - उपनिषद, पुराण, नारद-पंचरात्र, आदि - को नज़रअंदाज करती है, समाज में बस एक अनावश्यक गड़बड़ी है।" श्रीमद-भागवत को गलत तरीके से समझने के कारण, लोगों को कृष्ण के विज्ञान के बारे में गुमराह किया जाता है। हालाँकि, श्रील वृंदावन दास ठाकुर की पुस्तक को पढ़ कर कोई भी इस विज्ञान को बहुत ही आसानी से समझ सकता है।
