श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.8.33 
ओरे मूढ़ लोक, शुन चैतन्य - मङ्गल ।
चैतन्य - महिमा य़ाते जानिबे सकल ॥33॥
 
 
अनुवाद
अरे मूर्खो, श्री चैतन्य-मंगल पढ़ो! इस पुस्तक को पढ़कर तुम श्री चैतन्य महाप्रभु की समस्त महिमा को समझ सकते हो।
 
You fool, read Sri Chaitanya Mangala! By reading this book, you will understand all the glories of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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