रूप-रघुनाथ-पदे हैबे आकुति
कबे हाँमा बुझाबा से युगल-पिरिती
श्रील रूप गोस्वामी से लेकर रघुनाथ दास गोस्वामी तक सभी छह गोस्वामियों के विनम्र छात्र बनना चाहिए। उनके निर्देशों का पालन न करते हुए, कि कैसे गौरसुन्दर और राधा-कृष्ण की पूजा करें यह कल्पना करना, एक महान अपराध है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति नरक का रास्ता साफ करता है। यदि कोई छह गोस्वामियों के निर्देशों की उपेक्षा करता है और फिर भी राधा-कृष्ण का तथाकथित भक्त बन जाता है, तो वह केवल राधा-कृष्ण के वास्तविक भक्तों की आलोचना करता है। अटकलों के परिणामस्वरूप, वह गौरसुन्दर को एक साधारण भक्त मानता है और इसलिए भगवान राधा-कृष्ण की सर्वोच्च व्यक्तित्व की सेवा करने में प्रगति नहीं कर सकता है।
