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अनुवाद
"यदि हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करते समय किसी का हृदय परिवर्तित न हो, उसकी आँखों से आँसू न बहें, उसका शरीर काँप न उठे, और उसके रोंगटे न खड़े हो जाएँ, तो समझना चाहिए कि उसका हृदय लोहे के समान कठोर है। ऐसा भगवान के पवित्र नाम के चरणकमलों में किए गए उसके अपराधों के कारण है।"
"If someone's heart is not transformed, their eyes do not tear, their body does not tremble, or they do not feel thrilled while chanting the Hare Krishna mantra, then it should be understood that their heart is as hard as iron. This happens because of offenses against the lotus feet of the Lord."
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने श्रीमद्-भागवतम (2.3.24) के इस श्लोक की व्याख्या करते हुए, टिप्पणी की कि कभी-कभी एक महा-भागवत, या बहुत उन्नत भक्त, आँखों में आँसू जैसे ऐसे दिव्य लक्षण प्रकट नहीं करते, जबकि कभी-कभी एक कनिष्ठ-अधिकारी, एक नवोदित भक्त, उन्हें कृत्रिम रूप से प्रदर्शित करते हैं। हालाँकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नवोदित भक्त महा-भागवत भक्तों से अधिक उन्नत है। किसी के द्वारा हरि कृष्ण महा-मंत्र का जाप करने पर होने वाले हृदय परिवर्तन की असली कसौटी यह है कि वह भौतिक भोग से अलग हो जाता है। यह असली बदलाव है। भक्तिः परेशानुभवो विरक्तिरन्यत्र च (भाग. 11.2.42)। यदि कोई वास्तव में आध्यात्मिक जीवन में उन्नति कर रहा है, तो उसे भौतिक भोग से बहुत अलग हो जाना चाहिए। यदि कभी ऐसा पाया जाता है कि एक कनिष्ठ-अधिकारी (नवोदित भक्त) हरि कृष्ण मंत्र का जाप करते समय अपनी आँखों में कृत्रिम आँसू दिखाता है लेकिन फिर भी भौतिक चीजों से पूरी तरह से लगाव रखता है, तो उसका हृदय वास्तव में नहीं बदला है। बदलाव उसकी वास्तविक गतिविधियों के रूप में प्रकट होना चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥