श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 8: लेखक का कृष्ण तथा गुरु से आदेश प्राप्त करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.8.20 
हेन प्रेम श्री - चैतन्य दिला यथा तथा ।
जगाइ माधाइ पर्यन्त - अन्येर का कथा ॥20॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने कृष्ण का यह प्रेम सर्वत्र और सर्वत्र, यहाँ तक कि जगाई और माधाई जैसे अत्यंत पतित लोगों को भी, मुक्त भाव से प्रदान किया है। तो फिर उन लोगों की तो बात ही क्या जो पहले से ही पवित्र और श्रेष्ठ हैं?
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu has generously bestowed this love of Krishna everywhere, even to the most fallen of the low, like Jagai and Madhai. So what can be said about those who are already pure and elevated?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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