श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 7: भगवान् चैतन्य के पाँच स्वरूप  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.7.78 
धैर्य धरिते नारि, हैलाम उन्मत्त ।
हासि, कान्दि, नाचि, गाइ, यैछे मदमत्त ॥78॥
 
 
अनुवाद
“मैं भगवान के पवित्र नाम का शुद्ध आनंद में जप करते हुए स्वयं को खो देता हूँ, और इस प्रकार मैं पागलों की तरह हँसता, रोता, नाचता और गाता हूँ।
 
Chanting the Lord's name in pure ecstasy, I forget myself. Thus, I laugh, cry, dance, and sing like a madman.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)