श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 7: भगवान् चैतन्य के पाँच स्वरूप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.7.28 
यत यत प्रेम - वृष्टि करे पञ्च - जने ।
तत तत बाढ़े जल, व्यापे त्रि - भुवने ॥28॥
 
 
अनुवाद
पंचतत्व के पाँचों सदस्य जितना अधिक भगवत्प्रेम की वर्षा करते हैं, उतनी ही अधिक बाढ़ बढ़ती है और पूरे विश्व में फैलती है।
 
The more the five members of the Pancha Tattva shower the love of God, the more the flood increases and it spreads throughout the world.
तात्पर्य
कृष्ण चेतना अभियान न तो रूढ़िबद्ध है और न ही स्थिर है। मूढ़ और बदमाशों की आपत्तियों के बावजूद यह पूरी दुनिया में फैलेगा कि यूरोपीय और अमेरिकी म्लेच्छ ब्राह्मणों या संन्यासियों के रूप में स्वीकार नहीं किए जा सकते। यहाँ यह संकेत दिया गया है कि यह प्रक्रिया फैलेगी और पूरी दुनिया को कृष्ण चेतना से भर देगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)