श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 97
 
 
श्लोक  1.6.97 
ए - सबाके शास्त्रे कहे ‘भक्त - अवता र’ ।
‘भक्त - अवता र’ - पद उपरि सबार ॥97॥
 
 
अनुवाद
शास्त्र उन्हें भक्तावतार कहते हैं। ऐसे अवतार का स्थान अन्य सभी से ऊपर होता है।
 
The scriptures call him a devotee-incarnation. Such an incarnation has a status above all others.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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