श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  1.6.85 
केह माने, केह ना माने, सब ताँर दास ।
ये ना माने, तार हय सेइ पापे नाश ॥85॥
 
 
अनुवाद
कुछ लोग उन्हें स्वीकार करते हैं, जबकि अन्य नहीं, फिर भी सभी उनके सेवक हैं। तथापि, जो उन्हें स्वीकार नहीं करता, वह अपने पाप कर्मों के कारण नष्ट हो जाएगा।
 
Some accept Him and some do not, yet all are His slaves. Whoever does not accept Him will be destroyed by their sinful deeds.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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