केह माने, केह ना माने, सब ताँर दास ।
ये ना माने, तार हय सेइ पापे नाश ॥85॥
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अनुवाद
कुछ लोग उन्हें स्वीकार करते हैं, जबकि अन्य नहीं, फिर भी सभी उनके सेवक हैं। तथापि, जो उन्हें स्वीकार नहीं करता, वह अपने पाप कर्मों के कारण नष्ट हो जाएगा।
Some accept Him and some do not, yet all are His slaves. Whoever does not accept Him will be destroyed by their sinful deeds.
तात्पर्य
जब कोई जीव अपनी मौलिक स्थिति को भूल जाता है, तो वह खुद को भौतिक संसाधनों का उपभोक्ता बनाने के लिए तैयार हो जाता है। कभी-कभी उसे यह सोचकर भी गुमराह कर दिया जाता है कि भगवान की सर्वोच्च व्यक्तित्व के लिए सेवा पूर्ण समर्पण नहीं है। दूसरे शब्दों में, वह सोचता है कि भगवान की सेवा के अलावा एक जीव के लिए कई अन्य व्यस्तताएँ हैं। ऐसा मूर्ख व्यक्ति यह नहीं जानता कि किसी भी स्थिति में वह प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से सर्वोच्च भगवान की सेवा की गतिविधियों में शामिल होता है। वास्तव में, यदि कोई व्यक्ति भगवान की सेवा में संलग्न नहीं होता है, तो सभी अशुभ गतिविधियाँ उस पर व्याप्त हो जाती हैं क्योंकि सर्वोच्च भगवान, भगवान चैतन्य की सेवा, असीम जीवों की संवैधानिक स्थिति है। चूंकि जीव असीम है, इसलिए भौतिक भोग का आकर्षण उसे आकर्षित करता है, और वह अपनी संवैधानिक स्थिति को भूलकर पदार्थ का आनंद लेने की कोशिश करता है। लेकिन जब उसकी निष्क्रिय कृष्ण चेतना जागृत होती है, तो वह अब पदार्थ की सेवा में नहीं लगता है बल्कि प्रभु की सेवा में लग जाता है। दूसरे शब्दों में, जब कोई अपनी संवैधानिक स्थिति को भूल जाता है, तो वह भौतिक प्रकृति के स्वामी के पद पर प्रकट होता है। उस समय भी वह सर्वोच्च भगवान का सेवक ही बना रहता है, लेकिन अयोग्य या भ्रष्ट अवस्था में।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥