श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.6.35 
याँर द्वारा कैल प्रभु कीर्तन प्रचार ।
याँर द्वारा कैल प्रभु जगनिस्तार ॥35॥
 
 
अनुवाद
उन्हीं [अद्वैत आचार्य] के माध्यम से भगवान चैतन्य ने संकीर्तन आंदोलन का प्रसार किया और उन्हीं के माध्यम से उन्होंने संसार का उद्धार किया।
 
Through him (Advaita Acharya) Sri Chaitanya Mahaprabhu spread the Sankirtan movement and through him he saved the world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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