श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.6.33 
अद्वैत - आचार्य - ईश्वरेर अंश - वर्य ।
ताँर तत्त्व - नाम - गुण, सकलि आश्चर्य ॥33॥
 
 
अनुवाद
श्री अद्वैत आचार्य परम प्रभु के प्रमुख अंग हैं। उनके सत्य, नाम और गुण सभी अद्भुत हैं।
 
Sri Advaita Acharya is the primary aspect of the Supreme Lord. His essence, name, and qualities are all wonderful.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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