वैष्णवेर गुरु तेंहो जगतेर आर्य ।
दुइ - नाम - मिलने हैल ‘अद्वैत - आचार्य’ ॥30॥
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अनुवाद
वे सभी भक्तों के गुरु हैं और संसार में सर्वाधिक पूजनीय हैं। इन दोनों नामों के योग से उनका नाम अद्वैत आचार्य पड़ा।
He is the guru of all devotees and the most revered person in the world. The combination of these two names gives him the name Advaita Acharya.
तात्पर्य
श्री अद्वैत आचार्य वैष्णवों के प्रधान संप्रदाय-गुरु हैं, और वे सभी वैष्णवों पूजन करने योग्य हैं। वैष्णवों को अद्वैत आचार्य के पदचिन्हों का अनुसरण करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से वास्तव में व्यक्ति भगवान की भक्ति सेवा में संलग्न हो सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥