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श्लोक 1.6.22  |
सेइ नारायणेर मुख्य अङ्ग - अद्वैत ।
‘अङ्ग’ - शब्दे अंश करि’ कहे भागवत ॥22॥ |
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| अनुवाद |
| श्री अद्वैत नारायण का प्रमुख अंग है। श्रीमद्भागवत में अंग को भगवान का पूर्ण अंश कहा गया है। |
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| These are the main parts of Sri Advaita Narayana. In the Srimad Bhagavatam, "Anga" is considered the "complete part" of God. |
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