श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.6.13 
कोटि अंश, कोटि शक्ति, कोटि अवतार ।
एत लञा सृजे पुरुष सकल संसार ॥13॥
 
 
अनुवाद
महाविष्णु अपने लाखों अंशों, शक्तियों और अवतारों से सम्पूर्ण भौतिक जगत का निर्माण करते हैं।
 
Mahavishnu creates the entire world with his millions of parts, powers and incarnations.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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