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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.6.12 
जगत्मङ्गल अद्वैत, मङ्गल - गुण - धाम ।
मङ्गल - चरित्र सदा, ‘मङ्गल’ याँर नाम ॥12॥
 
 
अनुवाद
श्रीअद्वैत आचार्य समस्त शुभ गुणों के भण्डार होने के कारण जगत के लिए सर्वमंगलकारी हैं। उनके गुण, कर्म और नाम सदैव शुभ हैं।
 
Sri Advaita Acharya is auspicious for the entire world, as he is the repository of all auspicious qualities. His characteristics, actions, and name are always auspicious.
तात्पर्य
श्री अद्वैत प्रभु, जो महा विष्णु के अवतार हैं, एक आचार्य, या शिक्षक हैं। उनकी सारी गतिविधियाँ और विष्णु की अन्य सभी गतिविधियाँ शुभ हैं। जो कोई भी भगवान विष्णु के अतीत में सभी शुभता को देख सकता है वह भी एक ही साथ शुभ हो जाता है। इसलिए, चूँकि भगवान विष्णु शुभता के स्रोत हैं, तो जो कोई भी भगवान विष्णु की भक्ति में आकर्षित होता है वह मानव समाज की सबसे बड़ी सेवा कर सकता है। भौतिक दुनिया के अस्वीकृत व्यक्ति जो जीवित प्राणियों के अनादि कार्य के रूप में शुद्ध भक्ति सेवा को समझने से इनकार करते हैं, और जीवित प्राणियों की स्थितिबद्ध जीवन से वास्तविक मुक्ति को समझने से इनकार करते हैं, वे अपने ज्ञान के खराब भंडार के कारण सभी भक्ति सेवाओं से वंचित रह जाते हैं।

अद्वैत प्रभु की शिक्षाओं में फलदायी गतिविधियों या अवैयक्तिक मुक्ति का कोई प्रश्न नहीं है। हालाँकि, भौतिक ऊर्जा के मंत्र द्वारा विमुग्ध, वे व्यक्ति जो यह नहीं समझ पाए कि अद्वैत प्रभु विष्णु से भिन्न नहीं हैं, वे अपनी अवैयक्तिक धारणाओं के साथ उनका अनुसरण करना चाहते थे। उन्हें दंडित करने का अद्वैत प्रभु का प्रयास भी शुभ है। भगवान विष्णु और उनकी गतिविधियाँ सभी भाग्य सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से प्रदान कर सकते हैं। दूसरे शब्दों में, भगवान विष्णु द्वारा पक्ष लिए जाने और भगवान विष्णु द्वारा दंडित किए जाने एक ही हैं क्योंकि विष्णु की सभी गतिविधियाँ निरपेक्ष हैं। कुछ के अनुसार, मंगल अद्वैत प्रभु का दूसरा नाम था। कारणात्मक अवतार, या एक विशेष अवसर के लिए भगवान विष्णु के अवतार के रूप में, वह भौतिक प्रकृति में आपूर्ति एजेंट या घटक हैं। हालाँकि, उन्हें कभी भी भौतिक नहीं माना जाता है। उनकी सारी गतिविधियां आध्यात्मिक हैं। जो कोई भी उनके बारे में सुनता है और उनका महिमामंडन करता है, वह खुद महिमामंडित हो जाता है, क्योंकि ऐसी गतिविधियाँ सभी प्रकार के दुर्भाग्य से मुक्त करती हैं। किसी को भी विष्णु रूप में किसी भौतिक संदूषण या अवैयक्तिकता का निवेश नहीं करना चाहिए। सभी को भगवान विष्णु की वास्तविक पहचान को समझने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि ऐसे ज्ञान से व्यक्ति पूर्णता की उच्चतम अवस्था प्राप्त कर सकता है।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)