श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 6: श्रीअद्वैत आचार्य की महिमाएँ अध्याय सात  »  श्लोक 101
 
 
श्लोक  1.6.101 
आत्मा हैते कृष्ण भक्ते बड़ करि’ माने ।
इहाते बहुत शास्त्र - वचन प्रमाणे ॥101॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण अपने भक्तों को स्वयं से भी महान मानते हैं। इस संबंध में शास्त्रों में प्रचुर प्रमाण उपलब्ध हैं।
 
Lord Krishna considers his devotees to be greater than himself. There is abundant evidence in the scriptures to support this.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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