श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  1.5.96 
निजाङ्ग - स्वेद - जल करिल सृजन ।
सेइ जले कैल अर्ध - ब्रह्माण्ड भरण ॥96॥
 
 
अनुवाद
फिर उन्होंने अपने शरीर के पसीने से जल उत्पन्न किया और उस जल से आधा ब्रह्माण्ड भर दिया।
 
Then he produced water from the sweat of his body and filled half the universe with that water.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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