श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.5.83 
आद्योऽवतारः पुरुषः परस्य कालः स्वभावः सदसन्मनश्च ।
द्रव्यं विकारो गुण इन्द्रियाणि विराट्स्वराट्स्थास्नु चरिष्णु भूम्नः ॥83॥
 
 
अनुवाद
"पुरुष [महा-विष्णु] भगवान के परम व्यक्तित्व के आदि अवतार हैं। काल, प्रकृति, कारण और प्रभाव के रूप में, मन, भौतिक तत्त्व, मिथ्या अहंकार, प्रकृति के गुण, इंद्रियाँ, विश्वरूप, पूर्ण स्वतन्त्रता तथा चर-अचर प्राणी तत्पश्चात् उनके ऐश्वर्य के रूप में प्रकट होते हैं।"
 
“Purusha (Maha Vishnu) is the principal incarnation of the Supreme Personality of Godhead. Time, nature, nature (in the form of cause and effect), mind, material elements, false ego, modes of nature, senses, universal form, complete freedom and the moving and unmoving beings ultimately appear in His opulent form.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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