श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  1.5.82 
आद्यावतार, महा - पुरुष, भगवा न् ।
सर्व - अवतार - बीज, सर्वाश्रय - धाम ॥82॥
 
 
अनुवाद
वह महापुरुष भगवान् के समान है। वह आदि अवतार, अन्य सभी का बीज तथा सबका आश्रय है।
 
The great being is non-different from the Supreme Personality of Godhead. He is the original incarnation, the seed of all else, and the support of everything.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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