श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 78
 
 
श्लोक  1.5.78 
यद्यपि कहिये ताँरे कृष्णेर ‘कला’ करि ।
मत्स्य - कूर्माद्यवतारेर तिंहो अवतारी ॥78॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि कारणोदशायी विष्णु को भगवान कृष्ण का एक रूप कहा जाता है, किन्तु वे मत्स्य, कूर्म तथा अन्य अवतारों के स्रोत हैं।
 
Although Kāronodakaśāyī Vishnu is called the "art" of Lord Kṛṣṇa, He is the origin of Matsya, Kurma and other incarnations.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd