श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  1.5.76 
गर्भोद - क्षीरोद - शायी दोंहे ‘पुरुष’ नाम ।
सेइ दुइ, झाँर अंश, विष्णु, विश्व - धाम ॥76॥
 
 
अनुवाद
गर्भोदशायी और क्षीरोदशायी दोनों को पुरुष कहा जाता है। वे कारणोदशायी विष्णु, प्रथम पुरुष, जो समस्त ब्रह्माण्डों के अधिष्ठान हैं, के पूर्ण अंश हैं।
 
Both Garbhodakashayi and Kshirodakashayi are called men. He is the complete part of Karanodakasayi Vishnu, the first man and the abode of all the universes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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