श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  1.5.65 
दूर हैते पुरुष करे मायाते अवधान ।
जीव - रूप वीर्घ ताते करेन आधान ॥65॥
 
 
अनुवाद
प्रथम पुरुष दूर से माया पर अपनी दृष्टि डालता है और इस प्रकार वह उसे जीवों के रूप में जीवन के बीज से गर्भित करता है।
 
The first man looks at Maya from a distance and thus he impregnates her with the semen in the form of a living being.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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