श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.5.63 
घटेर निमित्त - हेतु यैछे कुम्भकार ।
तैछे जगतेर कर्ता - पुरुषावतार ॥63॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार मिट्टी के बर्तन का मूल कारण कुम्हार है, उसी प्रकार भौतिक जगत का रचयिता प्रथम पुरुष अवतार [कारणार्णवशायी विष्णु] है।
 
Just as the potter is the original cause of the clay pot, similarly the creator of the physical world is the first incarnation of the Purusha (Vishnu in the ocean of cause).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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