| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 62 |
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| | | | श्लोक 1.5.62  | माया - अंशे कहि तारे निमित्त - कारण ।
सेह नहे, य़ाते कर्ता - हेतु - नारायण ॥62॥ | | | | | | | अनुवाद | | भौतिक प्रकृति का माया रूप ही ब्रह्मांडीय जगत का तात्कालिक कारण है। किन्तु यह वास्तविक कारण नहीं हो सकता, क्योंकि मूल कारण भगवान नारायण हैं। | | | | The illusory aspect of material nature is the immediate cause of the manifestation of the universe, but it cannot be the actual cause, because the original cause is Lord Narayana. | | ✨ ai-generated | | |
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