| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 1.5.60  | कृष्ण - शक्त्ये प्रकृति हय गौण कारण ।
अग्नि - शक्त्ये लौह यैछे करये जारण ॥60॥ | | | | | | | अनुवाद | | इस प्रकार भगवान कृष्ण की शक्ति से प्रकृति गौण कारण बन जाती है, जैसे अग्नि की शक्ति से लोहा लाल हो जाता है। | | | | In this way, nature becomes a secondary cause through the energy of Lord Krishna, just as iron becomes red through the energy of fire. | | ✨ ai-generated | | |
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