श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.5.39 
सिद्ध - लोकस्तु तमसः पारे यत्र वसन्ति हि ।
सिद्धा ब्रह्म - सुखे मग्ना दैत्याश्च हरिणा हताः ॥39॥
 
 
अनुवाद
"अज्ञान लोक [भौतिक ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति] से परे सिद्धलोक है। सिद्ध पुरुष वहाँ ब्रह्मानंद में लीन होकर निवास करते हैं। भगवान द्वारा मारे गए राक्षस भी उसी लोक को प्राप्त होते हैं।"
 
"Beyond the Tamas region (the physical universe) lies the realm of Siddhaloka. The Siddhas reside there, immersed in the bliss of the universe. Demons slain by the Lord also attain this realm."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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