श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.5.38 
निर्विशेष - ब्रह्म सेइ केवल ज्योतिर्मय ।
सायुज्येर अधिकारी ताँहा पाय लय ॥38॥
 
 
अनुवाद
वह निराकार ब्रह्म तेज केवल भगवान की तेज किरणों से ही बना है। सायुज्य मोक्ष के योग्य लोग उस तेज में विलीन हो जाते हैं।
 
That impersonal Brahman effulgence contains only the radiant rays of the Lord. Those who are fit for the state of Sayujya (liberation) merge into that effulgence.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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