श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.5.3 
एइ षट्श्लोके कहिल कृष्ण - चैतन्य - महिमा ।
पञ्च - श्लोके कहि नित्यानन्द - तत्त्व - सीमा ॥3॥
 
 
अनुवाद
मैंने छः श्लोकों में श्री कृष्ण चैतन्य की महिमा का वर्णन किया है। अब पाँच श्लोकों में मैं भगवान नित्यानन्द की महिमा का वर्णन करूँगा।
 
I have described the glories of Sri Krishna Chaitanya in six verses. Now I will describe the glories of Lord Sri Nityananda in five verses.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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