श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.5.25 
एइ तिन लोके कृष्ण केवल - लीला - मय ।
निज - गण लञा खेले अनन्त समय ॥25॥
 
 
अनुवाद
केवल इन्हीं तीन स्थानों (द्वारका, मथुरा तथा गोकुल) में सर्वक्रीड़ारत भगवान कृष्ण अपने निजी पार्षदों के साथ अपनी अनंत लीलाएँ करते हैं।
 
Only in these three places (Dwaraka, Mathura and Gokul) does the playful Lord Krishna perform endless pastimes with His personal associates.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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