श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 234
 
 
श्लोक  1.5.234 
नित्यानन्द - प्रभुर गुण - महिमा अपार ।
‘सहस्र - वदने’ शेष नाहि पाय याँर ॥234॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द के दिव्य गुणों की महिमा अपरम्पार है। भगवान शेष भी अपने हजारों मुखों से उनकी सीमा नहीं पा सकते।
 
The glories of Lord Nityananda's transcendental qualities are unfathomable; even Lord Sesha, with His thousands of mouths, cannot reach their limits.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd