श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 233
 
 
श्लोक  1.5.233 
आपनार कथा लिखि निर्लज्ज हइया ।
नित्यानन्द - गुणे लेखाय उन्मत्त करिया ॥233॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपनी कहानी बिना किसी संकोच के लिख दी है। भगवान नित्यानंद के गुण मुझे पागल सा बना देते हैं और मुझे ये सब लिखने पर मजबूर करते हैं।
 
I have written my personal story without hesitation. Lord Nityananda's qualities drive me crazy and compel me to write these things.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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