श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 232
 
 
श्लोक  1.5.232 
से सब पाइनु आमि वृन्दावने आय ।
सेइ सब लभ्य एइ प्रभुर कृपाय ॥232॥
 
 
अनुवाद
मैंने यह सब वृन्दावन आकर प्राप्त किया है और यह भगवान नित्यानंद की कृपा से संभव हुआ है।
 
I have achieved all this by coming to Vrindavan and this has been possible due to the grace of Nityananda Prabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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