श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 221
 
 
श्लोक  1.5.221 
याँर ध्यान निज - लोके करे पद्मासन ।
अष्टादशाक्षर - मन्त्रे करे उपासन ॥221॥
 
 
अनुवाद
भगवान ब्रह्मा अपने धाम में कमल के आसन पर बैठकर सदैव उनका ध्यान करते हैं और अठारह अक्षरों वाले मंत्र से उनकी पूजा करते हैं।
 
Brahma, seated on a lotus seat in his own world, always meditates on Him and worships Him with the Ashtadasakshar (eighteen lettered) mantra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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