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अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ
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श्लोक 207
श्लोक
1.5.207
एमन निघृण मोरे केबा कृपा करे ।
एक नित्यानन्द विनु जगत्भितरे ॥207॥
अनुवाद
इस संसार में नित्यानंद के अतिरिक्त और कौन है जो मुझ जैसे घृणित व्यक्ति पर दया कर सके?
Who in this world, without Nityananda, could have shown mercy to a despicable man like me?
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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