श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 202
 
 
श्लोक  1.5.202 
याँहा हैते पाइनु रघुनाथ - महाशय ।
याँहा हैते पाइनु श्री - स्वरूप - आश्रय ॥202॥
 
 
अनुवाद
उनकी कृपा से मुझे महापुरुष श्री रघुनाथदास गोस्वामी की शरण प्राप्त हुई है और उनकी कृपा से ही मुझे श्रीस्वरूप दामोदर की शरण मिली है।
 
By his grace I have got the shelter of a great man like Shri Raghunathdas Goswami and by his grace I have got the shelter of Shri Swarup Damodar.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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