श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 193
 
 
श्लोक  1.5.193 
नित्यानन्द - स्वरूपेर देखिया वैभव ।
किबा रूप, गुण, लीला - अलौकिक सब ॥193॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने भगवान नित्यानन्द स्वरूप में ऐसा ऐश्वर्य देखा। उनका अद्भुत रूप, गुण और लीलाएँ सभी दिव्य हैं।
 
Thus I saw such majesty in the form of Sri Nityananda. His wonderful form, qualities, and pastimes are all transcendental.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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