| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 191 |
|
| | | | श्लोक 1.5.191  | पारिषद - गणे देखि सब गोप - वेशे ।
‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ कहे सबे सप्रेम आवेशे ॥191॥ | | | | | | | अनुवाद | | उनके भक्त, ग्वालबालों के समान वेश धारण किये हुए, मधुमक्खियों की तरह उनके चरणों को घेरे हुए थे और आनंदित प्रेम में लीन होकर “कृष्ण, कृष्ण” का जाप भी कर रहे थे। | | | | His devotees, dressed like cowherds, surrounded his feet like a multitude of bees. They chanted, "Krishna, Krishna," in ecstasy. | | ✨ ai-generated | | |
|
|