श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 189
 
 
श्लोक  1.5.189 
प्रेमे मत्त अङ्ग डाहिने - वामे दोले ।
‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ बलिया गम्भीर बोल बले ॥189॥
 
 
अनुवाद
उनका शरीर इधर-उधर, दाएँ-बाएँ हिल रहा था, क्योंकि वे परमानंद में लीन थे। वे गहरी आवाज़ में "कृष्ण, कृष्ण" का जाप कर रहे थे।
 
His body swayed from side to side, left and right, as he was immersed in love. He chanted, “Krishna, Krishna,” in a deep voice.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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