श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.5.17 
सर्वोपरि श्री - गोकुल - ब्रजलोक - धाम ।
श्री - गोलोक, श्वेतद्वीप, वृन्दावन नाम ॥17॥
 
 
अनुवाद
सबसे ऊंचे श्रीगोकुल को व्रज, गोलोक, श्वेतद्वीप और वृन्दावन भी कहा जाता है।
 
The highest among these is Shri Gokul, which is also known as Vraj, Goloka, Shwetdweep and Vrindavan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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