श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.5.16 
ताहार उपरि - भागे ‘कृष्ण - लोक’ - ख्याति ।
द्वारका - मथुरा - गोकुल - त्रि - विधत्वे स्थिति ॥16॥
 
 
अनुवाद
उस आध्यात्मिक आकाश के सर्वोच्च क्षेत्र में कृष्णलोक नामक आध्यात्मिक लोक है। इसके तीन भाग हैं - द्वारका, मथुरा और गोकुल।
 
In the highest part of that spiritual sky there is a spiritual world called Krishnaloka.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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