श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 150
 
 
श्लोक  1.5.150 
रामेर चरित्र सब , - दुःखेर कारण ।
स्वतन्त्र लीलाय दुःख सहेन लक्ष्मण ॥150॥
 
 
अनुवाद
भगवान राम के कार्यकलाप कष्टों से भरे थे, किन्तु लक्ष्मण ने स्वेच्छा से उस कष्ट को सहन किया।
 
Lord Rama's activities were full of suffering, but Lakshmana willingly endured that suffering.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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