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श्लोक 1.5.148  |
आचार्य - गोसाञि र तत्त्व ना याय कथन ।
कृष्ण अवतारि येंहो तारिल भुवन ॥148॥ |
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| अनुवाद |
| मैं अद्वैत आचार्य के सत्य का वर्णन नहीं कर सकता। उन्होंने भगवान कृष्ण को अवतरित करके समस्त जगत का उद्धार किया है। |
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| I cannot describe the essence of Advaita Acharya. He has brought about the incarnation of Krishna and saved the entire world. |
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