| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 14 |
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| | | | श्लोक 1.5.14  | प्रकृतिर पार ‘परव्योम - नामे धाम ।
कृष्ण - विग्रह यैछे विभूत्यादि - गुणवान् ॥14॥ | | | | | | | अनुवाद | | भौतिक प्रकृति से परे परव्योम नामक लोक है, जो आध्यात्मिक आकाश है। स्वयं भगवान कृष्ण की तरह, इसमें भी सभी दिव्य गुण, जैसे छह ऐश्वर्य, विद्यमान हैं। | | | | Beyond material nature lies the spiritual sky, Paravyoma. It is endowed with all the transcendental qualities, such as the six opulences, just like Krishna himself. | | ✨ ai-generated | | |
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