श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  1.5.139 
क्वचिक्रीड़ा - परिश्रान्तं गोपोत्सङ्गोपबर्हणम् ।
स्वयं विश्रामयत्या पाद - संवाहनादिभिः ॥139॥
 
 
अनुवाद
"कभी-कभी जब भगवान कृष्ण के बड़े भाई, भगवान बलराम, खेलने के बाद थक जाते थे और अपना सिर एक ग्वाल-बाल की गोद में रख देते थे, तब भगवान कृष्ण स्वयं उनके पैर दबाकर उनकी सेवा करते थे।"
 
“Sometimes, when Lord Balarama, Krishna's elder brother, would get tired after playing and would place his head in the lap of a cowherd boy, Lord Krishna himself would serve him by massaging his feet.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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