| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 5: भगवान् नित्यानन्द बलराम की महिमाएँ » श्लोक 125 |
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| | | | श्लोक 1.5.125  | सेइ त’ अनन्त, याँर कहि एक कला ।
हेन प्रभु नित्यानन्द, के जाने ताँर खेला ॥125॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान अनंत जिनके एक कला या पूर्ण अंश हैं, वे भगवान नित्यानंद प्रभु हैं। अतः भगवान नित्यानंद की लीलाओं को कौन जान सकता है? | | | | The being whose essence, that is, the part of the whole, is Lord Nityananda. Therefore, who can truly understand the divine activities of Lord Nityananda? | | ✨ ai-generated | | |
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